जब भी बिहार के शहरों की बात होती है, तो अक्सर पटना की राजनीतिक हलचल या गया की आध्यात्मिक भीड़ जेहन में आती है। लेकिन गंगा के किनारे बसा भागलपुर एक बिल्कुल अलग मिजाज रखता है। यहाँ क
हर नाम के पीछे एक कहानी होती है। कोई उम्मीद, कोई आशीर्वाद, कोई माता-पिता का सपना। सूर्यकांत नाम सुनते ही ज़ेहन में एक ऐसी शख्सियत उभरती है जिसमें रौशनी है, गर्मजोशी है और थोड़ा सा
नाम सिर्फ एक शब्द नहीं होता। यह एक पहचान होती है, एक विरासत, और कई बार एक पूरी कहानी। जब हम 'अजीत भारती' नाम सुनते हैं, तो यह महज दो शब्दों का मेल नहीं लगता। इसमें एक गहराई है, एक
एक नाम के पीछे अक्सर दो चीज़ें छिपी होती हैं—परिवार की आशा और समाज की भाषा। “उत्तम कुमार” इसी तरह का एक नाम है, जो सुनने में सरल लगता है, लेकिन उसके भीतर संस्कृति, इतिहास और व्यक्त
जब उज्जैन स्टेशन पर ट्रेन खुलती है तो सबसे पहले दो चीजें नाक में पहुंचती हैं: घी से बने लड्डू की मीठी खुशबू और चंदन की ठंडी सुगंध. अधिकतर लोग इस नगर को केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिं
प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में नदियों और तीर्थस्थलों का विशेष स्थान रहा है। कुंभ इसी आस्था का प्रतीक है, जहाँ लाखों लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाने के लिए एकत्रित होते हैं