2018 में दुबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में इमाम ने 14 विकेट लेकर साबित कर दिया कि वह महज एक "सपोर्ट बॉलर" नहीं हैं। उनकी गेंदें बाहर से आकर स्टंप्स की ओर मुड़ती थीं, जबकि बल्लेबाजों को लगता था कि वह सुरक्षित हैं। यही उनकी सफलता का राज है—गेंदबाजी को एक शतरंज की चाल की तरह खेलना।
कमाल का आंकड़ा: 100 टेस्ट विकेट की रेस
इमाम ने 2023 तक 90+ टेस्ट विकेट लेकर पाकिस्तानी स्पिन गेंदबाजों में अपनी जगह मजबूत की। वह अक्सर स्पॉट बॉलिंग करते हैं, जिससे बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है। उनकी इकोनॉमी रेट (टेस्ट में 2.8 से कम) इस बात का सबूत है कि वह टीम को दबाव बनाने में माहिर हैं।
आधुनिक क्रिकेट में स्पिन की नई परिभाषा
आज के दौर में जहां T20 क्रिकेट ने गेंदबाजों को हमलावर बना दिया है, इमाम ने टेस्ट क्रिकेट में स्पिन की "क्लासिक" शैली को जिंदा रखा है। वह गेंद को ज्यादा नहीं घुमाते, बल्कि लगातार एक ही जगह गेंद फेंककर बल्लेबाजों को गलती करने के लिए मजबूर करते हैं। यही वजह है कि पाकिस्तानी टीम उन्हें लंबे फॉर्मेट की "सीक्रेट वेपन" मानती है।
एक सच्चा टीम प्लेयर
इमाम कभी भी विकेटों के पीछे नहीं भागते—वह टीम की जरूरत के हिसाब से ओवर फेंकते हैं। चाहे वह रन रोकने का काम हो या विकेट चटकाने की जिम्मेदारी, वह हमेशा कप्तान के भरोसे पर खरे उतरते हैं। शायद यही वजह है कि पाकिस्तानी क्रिकेट में उन्हें "साइलेंट एसासिन" कहा जाता है।
क्रिकेट के इस दौर में जहां हर कोई छक्के मारने की बात करता है, इमाम-उल-हक जैसे गेंदबाज याद दिलाते हैं कि टेस्ट क्रिकेट अभी भी "धैर्य और सटीकता" का खेल है।