रात के तीन बजे का समय। शीतल हवा उज्जैन की संकरी गलियों से गुजर रही है और महाकाल मंदिर के आसपास जुटी भीड़ में एक अजीब-सी शांति छाई हुई है। ज्यादातर लोगों की नजर में उज्जैन सिर्फ एक और तीर्थस्थल है, जहाँ लोग दर्शन करने और पूजा-पाठ करने आते हैं। लेकिन जब आप वहाँ खड़े होकर घंटों चलने वाली भस्म आरती के बीच शहर की साँसें लेते हैं, तो एहसास होता है कि यह जगह समय के साथ एक बिल्कुल अलग रिश्ता रखती है।
प्राचीन काल में इस शहर को अवंतिका के नाम से जाना जाता था। तब यह केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं था, बल्कि विज्ञान, साहित्य और गणित की भी एक सरगर्म प्रयोगशाला थी। आज भी शहर के बीचोंबीच स्थित वेधशाला—जिसे मान मंदिर भी कहा जाता है—उन दिनों की गवाही देती है जब भारतीय खगोलशास्त्रियों ने सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की गति को यहीं से नापा था। एक बड़ी दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन भारतीय ज्योतिष और भूगोल में उज्जैन को भूमध्य रेखा नहीं, बल्कि प्रमुख देशांतर (Prime Meridian) माना जाता था। यानी समय की गणना का शून्य बिंदु इसी धरती से शुरू होता था।
यहीं पर उज्जैन की असली खूबसूरती छिपी है—इसका विज्ञान और आस्था के बीच का वो सेतु जो आज के दौर में लुप्त होता जा रहा है। एक तरफ महाकाल की अगाध भक्ति है, तो दूसरी तरफ आकाश के तारों को परखने की जिज्ञासा। शहर के छोटे-छोटे बाज़ारों और चाय की दुकानों पर बैठे स्थानीय लोगों की बातचीत से साफ जाहिर होता है कि उनके लिए यह कोई विरोधाभास नहीं है। वे सूर्य को देवता मानते हैं और साथ ही उसकी गति को गणित से भी समझते हैं।
आजकल हमारे बड़े शहरों ने घड़ियों और नोटिफिकेशन को दिनचर्या का एकमात्र पैमाना बना लिया है। उज्जैन में हालात कुछ और हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ जुड़ा यह शहर त्योहारों को भी उसी प्राकृतिक ताल में मनाता है। हर बारह साल में आने वाला सिंहस्थ मेला तो पूरी दुनिया का ध्यान खींचता ही है, लेकिन छोटी-मोटी एकादशियों और अमावस्याओं पर भी शिप्रा नदी के किनारे एक अलग ही सन्नाटा और भक्ति का स्वर गूँजता रहता है।
उज्जैन से गुजरना मतलब सिर्फ किसी पुरानी जगह का दौरा नहीं, बल्कि एक ऐसे विचार से मुलाकात है जहाँ प्राचीनता ने अपने आपको बचाकर रखा है। यहाँ की पत्थर की इमारतें, घाट और गलियाँ आपको जल्दबाजी छोड़ने पर मजबूर कर देती हैं। शायद इसीलिए यहाँ के राहगीर घूमने नहीं, बल्कि थोड़ा रुकने आते हैं।
सवाल यही है कि क्या हम अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी में उज्जैन जैसा कोई कोना बना पाएँगे, जहाँ समय की धड़कन सुनी जा सके?
उज्जैन: जहाँ समय की धड़कन धीमी पड़ जाती है
Source: HotArticle
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