दिल्ली के किसी सरकारी दफ्तर में, बेंगलुरु के टेक पार्क में, या पटना के मोहल्ले की दुकान पर आपको "मोहन यादव" नाम सुनने को मिल जाएगा। यह भारतीय समाज में एक सर्वसामान्य नाम है, लेकिन
हर नाम के पीछे एक कहानी होती है। कोई उम्मीद, कोई आशीर्वाद, कोई माता-पिता का सपना। सूर्यकांत नाम सुनते ही ज़ेहन में एक ऐसी शख्सियत उभरती है जिसमें रौशनी है, गर्मजोशी है और थोड़ा सा
नाम सिर्फ एक शब्द नहीं होता। यह एक पहचान होती है, एक विरासत, और कई बार एक पूरी कहानी। जब हम 'अजीत भारती' नाम सुनते हैं, तो यह महज दो शब्दों का मेल नहीं लगता। इसमें एक गहराई है, एक
खोज बॉक्स में एक नाम डालते ही हम अक्सर यही मान लेते हैं कि अब वह व्यक्ति हमारे सामने खुल जाएगा। पर सच्चाई यह है कि नाम कभी-कभी दरवाज़ा नहीं, दीवार होता है। “स्वतंत्र भारद्वाज” जैसे